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समस्या के सम्पूर्ण समाधान हेतु ................................



समस्या के सम्पूर्ण समाधान हेतु 

संबंधित का सतत् प्रपत्नशील रहना ही 

परम आत्म संतुष्ठी का श्रेष्ठतम् स्रोन्त्र है। 


 कवि अमृत 'वाणी' 


 

कायर, कंजूस और लालची ....................................................





कायर, कंजूस और लालची 
आर्थिक मामलों में सत्य के पूर्ण 
प्रकटीकरण तक झूंट बोलने में 
बड़े माहिर होते हैं
कवि अमृत 'वाणी'

 

हर द्वार, हर दिन, हर पल ....

 




"हर द्वार, हर दिन, हर पल 
केवल मुद्रा को ही 
भरपूर सम्मान मिलता है" 


कवि अमृत 'वाणी'

यू तो बोलते रहते जो बंदे .....




"यू तो बोलते रहते जो बंदे 
सुबह से शाम तक
 खामोश रह जाते 
वही हादसों में बरसों तलक"


 कवि अमृत 'वाणी'

 

हालात-ए-सूरत बदलनी चाहिए.....




हालात-ए-सूरत बदलनी चाहिए। 
तब्दीली जमीं पे दिखनी चाहिए ।।
 गुलिस्ता में फूल खिले ना खिले । 
चहरो पे रौनक दिखानी चाहिए ।। 


कवि अमृत 'वाणी'

 

अक्सर आने जाने में कुछ लोग......

 




"अक्सर आने जाने में कुछ लोग 
आदतन होते रहते इतने लेट 
आते आते निकल जाती 
कलेंडर की कई अगली डेट" 



कवि अमृत 'वाणी'





समय समय पर समय रहते .....

 




"समय समय पर समय रहते 
अपने समय को समय से मिलालों
 घड़ी बांधने से कुछ नहीं होगा जनाब 
घड़ी देखने की आदत भी डालो" 


अमृत 'वाणी'

सफ़र में मुश्किलें आए, तो हिम्मत और बढ़ती है..

 



सफ़र में मुश्किलें आए, तो हिम्मत और बढ़ती है.. 
अगर कोई रास्ता रोके, तो जुर्रत और बढ़ती है.. 
अगर बिकने पर आ जाओ, तो घट जाता है दाम अक्सर.. 
ना बिकने का इरादा हो तो, कीमत और बढ़ती है।"


अमृत 'वाणी'

सफलताएँ सीढ़ियों के अंतिम चरणों की .....

 

 सफलताएँ सीढ़ियों के अंतिम चरणों की तरह होती हैं 
जहाँ हर किसी को कई आंशिक रूप से विफल चरणों को 
पार करना पड़ता है। 


अमृत 'वाणी'

हर इंसा की जिंदगी में

 





हर इंसा की जिंदगी में कम से कम 
एक बार एक ऐसा दौर आना चाहिए 
कि उस दौर के दौरान वो शख्स 
हर दौर से गुज़र जाना चाहिए। 


अमृत 'वाणी'

अमृत सर रा लाड़ला...............


 अमृत सर रा लाड़ला,

अमृतसर को जाय।

अश्वमेघ में जाय के,

कलकत्ता में न्हाय।।